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हमर गाम कश्मीर सँ बेसी सुंदर अछि आ अहाँक ..... |
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बीच बहस मे
मिथिला पेंटिंग चाही बाज़ार, कलाकार त' घर बैसल छैथ
अपन कश्मीर यात्रा मे मिथिलाक गामक स्मृति क़े धरोहर क़े संग राखि हम दर्जनों गामक यात्रा केलहुं . ई जानबाक प्रयास मे छलहूँ जे हमर गाम सं कश्मीरक गाम कियाक बिलकुल अलग अछि ? कियाक बगैर पलायन क़े कश्मीरी समाज मिथिला क़े गाम सं ज्यादा खुशहाल अछि .कारण सिर्फ ओहिठामक पारंपरिक हस्तकला अछि .खेती बाड़ी क़े अलवा तक़रीबन हर व्यक्ति दस्तकारी में निपुण अछि .हर हाथ क़े बारहो महिना काज अछि .लेकिन मिथिला में रोजी रोटी क़े लेल पलायन क़े अलावा कोनो विकल्प नहि अछि .जखन कि हुनका संग हजारो वर्षक शानदार परंपरा आ हस्त कला (मिथिला पेंटिंग ) मौजूद अछि .
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गणतंत्र दिवस पर मिथिलाक झांकी:धरहरा इज प्रौड ऑफ़ मिथिलांचल
गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर निकलल राज्यक झांकी में अहि बेर बिहारक विषय छल भागलपुर जिलाक ' आदर्श ग्राम “धरहरा” जतय बेटी जन्म पर खुशी मनाओल जाइत छैक. संगहि ओकर नाम स’ कम स’ कम दस टा गाछ सेहो लगाओल जाइत छैक .मिथिलालोक अपन बेटी क़े सम्मान क़े खास तौर पर लगातार प्रचारित -प्रसारित कयने छळ .दहेज़ समस्या भले ही मिथिला में बिकराल रूप लय लेलक अछि लेकिन अखनो मिथिलान्चाल्क कतेको गाम बेटी क़े सम्मान क' लेल निरंतर प्रयासरत अछि .कन्यादान मिथिला समाज में आध्यात्मिक चिंतन सं जोड़ल गेल अछि लेकिन दहेज़ क' लोभ एकर महत्व क़े गौण कय रहल अछि लेकिन धरहरा गाम अहि आध्यात्मिकता क़े आदर्श अछि..ReadMore YourFeedback
अपन गाम में अनचिन्हार बाबू लाल
अपन अल्प ज्ञान आ सीमित अनुभव क़े संग अहि रहस्य क़े जानबाक हमर निरंतर प्रयास रहल जे मिथिलाक विकास क़े कोन सूत्र अछि जे साकार भय रहल अछि .पिछला २० वर्ष में मिथिला चहुमुखी विकसित भेल अछि .दुरा- दरबाजा सं लयक घर -आंगन क़े रूप आ रेखा बदलि गेल अछि .समाजक भूमिका सिकुडल त' दलान लापता भ' गेल या आकार -विचार सं छोट भ' गेल .ढोल -पिपही क़े बजाय आब घर -आँगन में डेक आ ड्रम बाजे लागल .भांग क़े जगह शराव लय लेलक .पान त' गुटका क़े तेज आंधी में लापता भ' गेल .मिथिलाक अहि प्रगति क़े कोन श्रेणी में राखल जाय ई तय केनाय मुश्किल अछि ...Read More Your Feedback
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बुढ़’क अर्थशास्त्र
लेखक: खट्टर काका
भातिज लोकनि;
हमरा बुझल अछि जे हमर फोटो देखि अहाँ लोकनि अपन आँखि भौँह सरियाबे लागल होयब. अधिकाँश लोकनि’क मुँह सँ बिनु प्रयासे के मुस्की छुटि रहल होयत. मुदा हम अपने लोकनिक मुस्की’क कारण जानए चाहैत छी. आई धरि कहियो एहेन भेल अछि जे हम अहाँ लोकनि केँ कोनो अनरगल गप्प कहने रही. हमर प्रत्येक गप्प गम्भीर होइत छैक. खट्टर काका कोनो व्यक्तित्व नहि एक सँस्कृति’क नाम थीक
.ओह अहाँ लोकनि तँ सत्ते गम्भीर भऽ गेलहुँ. गम्भीर भेला सँ कोनो खरापी नहि, मुदा अति सर्वत्र वर्जयेत. आई हम फेर सँ अपन तरँग मे छी आ बेसी गम्भीर भेला सँ असल विषय वस्तु पाछु छुटि जायत..Read More Your Feedback!
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अन्सोहात बिहार क ' विकास गाथा |
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मिथिला पेंटिंग वाला मधुबनी बनल आतंक क़े मोड्यूल
वर्षो पहिने कोनो निर्दोष व्यक्ति क़े हत्या क़े सजा मिथिला क़े कतेको गाम एखनो पावि रहल अछि .फला गाम क' नाम बुढ पुरान एखनो भोरे भोर नहि लैत छैथ .मिथिला में बनैया ,भुतही ,खुर्लुची सनक अनेको गामक उपनाम भेट जायत .लेकिन ओही अहिंसक मिथिला क़े मधुबनी जिला आई आतंक आ हिंसक अपराध क़े कारणे मधुबनी मोड्यूल क़े नाम सं जानल जायत अछि .पिछला पांच वर्ष में देश में भेल लगभग तमाम आतंकवादी घटना क़े तार मधुबनी सं जुडल अछि . अहि जिला क़े दर्जनों अपराधी इंडियन मुजाहिद्दीन आ लश्करे तोइबा सं संबध रखबाक कारणे पुलिस हिरासत में छैथ .मधुबनी पेंटिंग क़े नाम सं मशहूर ई जिला, मिथिलाक सरलता,विद्वता आ सांस्कृतिक विरासत क़े कारने सुविख्यात छळ .लेकिन अचानक आतंकवादी मोड्यूल क़े नाम सं किएक कुख्यात भेल ई पैघ सवाल अछि.Read More Your Feedback
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कोसी पीड़ित के विश्व बैंक सं उम्मीद |
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राजनगर स्टेशन : दरकार अछि एकटा श्रवन कुमार
मधुबनी सं ठीक एक स्टेशन आगा राजनगर , यानी दरभंगा -जयनगर रेलखंड क़े एक महत्वपूर्ण स्टेशन रेलवे क़े मानचित्र पर वर्षो सं जुडल अछि लेकिन स्पीड क़े मामला में एकर सरोकार ४० साल क़े वाबजूद एक्सप्रेस सं नहि भ' सकल .मिथिलाक एतिहासिक धरोहर आ संस्कृति क़े जिवंत दस्तावेज क़े साक्षी राजनगर पर्यटन त दूर अपन लोकक सरोकार सं सेहो दूर भय गेल .नव पीढ़ी क़े शायदे मोन हेतैंह अहिठामक कामख्या मंदिर ,सफ़ेद संगमरमर क़े काली मंदिर ,नौलखा आदि आदि .लेकिन समाज और सरकारक बेरुखी क़े कारण मिथिलाक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल राजनगर आई खंडहर में तब्दील भ' रहल अछि ..Read More Your Feedback!
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साक्षर बिहार मे खस्ताहाल शिक्षा |
कथिके क़े मैथिल ?संघर्षरत मैथिली क़े सवाल
भाषा कोनो समाज क़े पहचान होयत अछि .भाषा ओही समाजक सांस्कृतिक उद्घोषक क़े संग संग व्यक्ति में सामजिक भाव उत्पन करैत अछि .लेकिन विकासक अँधा दौर में आई दुनिया क़े ९० फीसद भाषाक अस्तित्व संकट में अछि त' दर्जनों प्राचीन भाषा विलोपित भ' चुकल अछि .मिथिलाक अति प्राचीन भाषा मैथिली आई अपन अस्तित्व क़े लेल संघर्ष कय रहल अछि .भाषा वसुधा नामक एक महत्वपूर्ण आयोजन में प्रख्यात भाषा विद भारतीय भाषा क़े दम तोडैत हालत पर चिंता जतौलेंह अछि .दुनिया भरि क़े ९०० भाषा क़े प्रतिनिधि गुजरात क़े बरोदरा में जमा भय प्राचीन भाषा क़े बचेबाक गुहार लागोलैंह .भारत क़े क्षेत्रीय भाषा क़े प्रतिनिधि अहि बात पर चिंता जतौलेंह जे इंग्लिश क़े वर्चस्व में शासन और सरकार सैकड़ो भाषाक सरिता क़े श्रोत बंद कय देलक अRead More Your Feedback
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