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हमर गाम कश्मीर सँ बेसी सुंदर अछि आ अहाँक ..... PDF Print E-mail
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बीच बहस मे

महामूर्ख सम्मलेन क़े बाद ब्राह्मन महाकुम्भ

यादव महासभा ,कुर्मी महासंगम ,पासी समाज क ललकार ,अहीर सम्मलेन ,वैश्य समाज सम्मलेन ,महामूर्ख सम्मलेन क़े कड़ी में ब्राह्मन महाकुम्भ क़े चर्चा  चौकाबय वाला अछि .जाहि दौर में  बिहार में सत्ता क़े राजनीति भूमिका बनाबय क़े लेल जातिगत समाज आ आन्दोलन उफान पर छळ .ब्राह्मन महासभाक कोनो अस्तित्व नहि छळ.लेकिन अचानक मिथिला में ब्राह्मन महासभा क़े चर्चा में जवाब कम सवाल बेसी अछि . .सामाजिक आ वैचारिक रूप सं कोना में धकेल देल गेल  अहि समाज क़े सामने पलायन क़े अलावा कोनो विकल्प नहि छळ .८०-९० क़े दशक में मिथिलाचल क़े गामक गाम खाली भ' गेल लेकिन कोनो ब्राह्मन महासभा अहि पलायन क़े पीड़ा सं व्यथित समाज क़े रास्ता देखाबय सामने नहि आयल .पहिले गाम सं पढ़ल -लिखल लोग पलायन केलैथ जाहि में तादाद ब्राह्मन क़े बेसी छळ .बाद में ई पलायन संस्कृति बनि गेल आ हर जाति आ वर्ग क़े लेल पलायन जीवन संघर्ष क़े विकल्प बनि गेल .Read More Your Feedback


आशा क़े पूल आ मिथिलांचल क़े मनोरथ

७० साल बाद विभाजित मिथिलाचल क़े एक पूल एक सूत्र में जोड़ी देलक अछि .कोसी क़े महातांडव सं उजडल उपटल मिथिलांचल में ई महासेतु एक उम्मीद जगोलक अछि .लेकिन व्यवस्थापक आ शासन क़े एही पूल क़े लेल नाम नहि भेटि रहल छैन्ह .सरकार क़े चाही ओहन नाम जाई सं हुनकर राजनितिक मंशा पूरा भ' सके .लोक क़े चाही ओहन नाम जाहि सं ओ अपन सरोकार जोड़ी सके .लेकिन पूल क़े निर्माण में योगदान केंद्र सरकारक अछि .जाहिर अछि केंद्र स्थानीय राजनीति क़े प्रभावित करैक लेल कोनो नाम खोजत .जखन की नीतीश सरकार ई श्रेय लेबे क़े लेल उत्सुक अछि जे पूल क़े शिलान्यास अटल जी क़े सरकार क़े वक्त भेल छळ.ReadMore YourFeedback


मिथिला पेंटिंग चाही बाज़ार, कलाकार त' घर बैसल छैथ

अपन कश्मीर यात्रा मे मिथिलाक  गामक स्मृति क़े धरोहर क़े संग राखि हम दर्जनों गामक यात्रा केलहुं . ई जानबाक प्रयास मे छलहूँ जे हमर गाम सं कश्मीरक गाम कियाक बिलकुल अलग अछि ? कियाक बगैर पलायन क़े कश्मीरी समाज मिथिला क़े गाम सं ज्यादा खुशहाल अछि .कारण सिर्फ ओहिठामक पारंपरिक हस्तकला अछि .खेती बाड़ी क़े अलवा तक़रीबन हर व्यक्ति दस्तकारी में निपुण अछि .हर हाथ क़े बारहो महिना काज अछि .लेकिन मिथिला में रोजी रोटी क़े लेल पलायन क़े अलावा कोनो विकल्प नहि अछि .जखन कि हुनका संग हजारो वर्षक शानदार परंपरा आ हस्त कला (मिथिला पेंटिंग ) मौजूद अछि .

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साहित्य

बुढ़’क अर्थशास्त्र

लेखक: खट्टर काका

भातिज लोकनि;

हमरा बुझल अछि जे हमर फोटो देखि अहाँ लोकनि अपन आँखि भौँह सरियाबे लागल होयब. अधिकाँश लोकनि’क मुँह सँ बिनु प्रयासे के मुस्की छुटि रहल होयत. मुदा हम अपने लोकनिक मुस्की’क कारण जानए चाहैत छी. आई धरि कहियो एहेन भेल अछि जे हम अहाँ लोकनि केँ कोनो अनरगल गप्प कहने रही. हमर प्रत्येक गप्प गम्भीर होइत छैक. खट्टर काका कोनो व्यक्तित्व नहि एक सँस्कृति’क नाम थीक

.ओह अहाँ लोकनि तँ सत्ते गम्भीर भऽ गेलहुँ. गम्भीर भेला सँ कोनो खरापी नहि, मुदा अति सर्वत्र वर्जयेत. आई हम फेर सँ अपन तरँग मे छी आ बेसी गम्भीर भेला सँ असल विषय वस्तु पाछु छुटि जायत..Read More Your Feedback!


 

 

 
अन्सोहात बिहार क ' विकास गाथा

गामक स्कूल क़े अहाँक गुरु दक्षिणा क़े जरूरत छैक

मिथिला में ई दावा केनिहार  हजारो में भेटि जेताह जे   गुरु दक्षिणा क़े परंपरा एतय  सदियों सं रहल अछि .ज्ञान आ विद्या  क़े मामला में कतेको गाम गुरुकुल क़े रूप में ख्यात भेल अछि .लेकिन गुरु दक्षिणा क़े नाम पर हमरा याद नहि अछि जे "शनिचरा" सं कहियो आगा बढ़ी सकलहु .देशक मशहूर उद्योगपति सिद्धार्थ योग अपन अमेरिकी  गुरु क़े ११ मिलियन डॉलर भेट कय गुरु दक्षिणा क़े परम्परा सं भारतीय समाज क़े अवगत करौलेंह अछि .

अमेरिका क़े हार्वर्ड बिज़नस स्कूल  क़े छात्र सिद्धार्थ योग अपन कंपनी जेंडर ग्रुप सं ख्याति आ धन अर्जित केलैंह त' अपन स्कूल क़े प्रति आभार व्यक्त केलेंहRead More Your Feedback


 
कोसी पीड़ित के विश्व बैंक सं उम्मीद

मिथिला: उपेक्षित धरोहर आ संकट में पहचान

मधुबनी जिलाक सुपरचित गाम अंधराठाढ़ी कहिया सं  वाचस्पति नगर क़े नाम सं जानल गेल ई बतेनाय मुश्किल अछि लेकिन सदियों सं ई गाम वाचस्पति मिश्र क़े लेल सुविख्यात रहल अछि .मिथिलाक विद्वता आ रचनाशीलता क़े कारण जे  ख्याति भेटल ओकर श्रेय  वाचस्पति ,मंडन आ हिनकर समकालीन विद्वान क़े  जायत अछि .भारतीय संस्कृति क़े  उन्नयन आ विकास में वाचस्पति मिश्र क़े योगदान अविस्मरनीय अछि .लेकिन मिथिलाक धरोहर  वाचस्पति मिश्रक संग्रहालय आई जीर्ण शीर्ण हालत में अछि . वाचस्पति संग्रहालय जतय दू  हजार साल स उपर के पुरावशेष संग्रहित छळ ,आई जर्जर हालत में अछि .समाज क़े उपेक्षा कारणे किछु वर्ष पहिने अहि संग्रहालय क़े अधिग्रहण राज्य सरकार कय लेलक लेकिन संग्रहालय क़े उपेक्षा जारी रहल . 
स्व. सहदेव झा द्वारा स्थापित अहि संग्रहालय में संग्रहित मिथिलाक प्राचीन धरोहर समाज क़े थाती छळ .मिथिलाक मानवशास्त्र क़े अध्यन क़े लेल ई पैघ शोध संस्थान भ' सकैत छळ.Read More Your Feedback!


 
साक्षर बिहार मे खस्ताहाल शिक्षा

कथिके क़े मैथिल ?संघर्षरत मैथिली क़े सवाल

भाषा कोनो समाज क़े पहचान होयत अछि .भाषा ओही  समाजक सांस्कृतिक उद्घोषक क़े संग संग व्यक्ति में सामजिक भाव उत्पन करैत अछि .लेकिन विकासक अँधा दौर में आई दुनिया क़े ९० फीसद भाषाक अस्तित्व संकट में अछि त' दर्जनों प्राचीन भाषा विलोपित भ' चुकल अछि .मिथिलाक अति प्राचीन भाषा मैथिली आई अपन अस्तित्व क़े लेल संघर्ष कय रहल अछि .भाषा वसुधा नामक एक महत्वपूर्ण आयोजन में प्रख्यात भाषा विद भारतीय भाषा क़े दम तोडैत हालत पर चिंता जतौलेंह अछि .दुनिया भरि क़े ९०० भाषा क़े प्रतिनिधि गुजरात क़े बरोदरा में जमा भय प्राचीन भाषा क़े बचेबाक गुहार लागोलैंह .भारत क़े क्षेत्रीय भाषा क़े प्रतिनिधि अहि बात पर चिंता जतौलेंह जे इंग्लिश क़े वर्चस्व में शासन और सरकार सैकड़ो भाषाक सरिता क़े श्रोत बंद कय देलक अRead More Your Feedback


 
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